कलाकार विंसेंट वॉनगॉग की कला में प्रेरणा रूप प्रकृति
Renu,Sonika
摘要
पश्चिम के प्रसिद्ध कलाकार,, नीदरलैंड में जन्मे विन्सेंट वाॅनगाॅग एक विलक्षणी प्रतिभा के प्रकृति प्रेमी स्वभाव के थे। प्रकृति ने मनुष्य को हर क्षेत्र में प्रभावित किया है, जिसे विभिन्न कलाकारों ने, जैसे - कवि ने कविताओं में, लेखक ने लेख म,ें संगीतकार ने अपने संगीत में और चित्रकार ने अपने चित्रों में संसार के सम्मुख प्रस्तुत किया है। विन्सेंट के अनुसार ’’यदि आप सचमुच प्रकृति से प्रेम करते हैं, तो आपको हर जगह सुंदरता मिलेगी।’’ विंसेंट वाॅनगाॅग ने अपनी कृतियों के माध्यम से अपना प्रकृति के प्रति दृष्टिकोण को प्रस्तुत किया है। वह बचपन से ही एकांत प्रिय व्यक्तित्व के थ,े इस कारण वे प्रकृति से अपना रिश्ता गहरा करते चले गए। वह पेड़, पौध,े फूल, पहाड़़ और पक्षियों के प्रति एक संप्रेषण की प्रणाली रखते थे। विन्सेंट का मन सदेैेव अशांत व विरक्तता से भरा रहता था। वे इस संसार में अपने लक्ष्य की खोज की ललक में प्रकृति में ही समाहित होने लगे, क्योंकि यहां उन्हें शांति और सुकून की प्राप्ति होती थी। विन्सेंट ने प्रकृति के प्रत्येक क्षण के प्रकाश तथा रंग को तत्क्षण अपने कैनवास में कैद किया यहां तक कि झाड़ियों और गेहूं की लहर में हवा को भी कैद कर दर्शकों को विस्मित् कर दिया। यह एक ऐसे कलाकार थे, जिन्हें अपने शरीर की चिंता ना होकर, प्रकृति के प्रत्येक प्रहर को चित्रित करने की अधिक चिंता होती थी। उनके पास खाने के लिए कुछ हो न हो, परंतु रंग, कैनवास और ब्रश पर्याप्त होने चाहिए, तो वे इसी में संतुष्ट रहते थे। सूर्य की उग्र किरणें भी उन्हें निरंतर चित्र बनने से नहीं रोक पाई, परंतु कई कारणों वश विंसेंट की शारीरिक व मानसिक क्षति होने लगी, जिसके चलते भी उन्होंने चित्रों को बनाना त्यागा नहीं, बल्कि अपनी उस समय की आंतरिक स्थिति को प्रकृति के साथ विलय कर श्रेष्ठ कृतियों का निर्माण किया। इसी अपराजित वृत्ति के कारण ही आज संसार में वह अपनी एक अविभाजित छवि का निर्माण कर सकें है।
